Pratham Kiran Newssecurity forces in Manipur
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मैतई विद्रोही ग्रुप ने कहा की 13 मारे गये लोग हमारे नई भर्ती

MANIPUR VIOLANCE

पिछले सप्ताह मरगये 13 अज्ञात लोगों की पहचान मैतई लोगों के रूप मैं हुई ।

मैतई वद्रोहियों ने जिन  13 अज्ञात लोगों की हत्या एक सप्ताह पाहिले हुई थी  उन्हें अपना नई भर्ती बताया।

13 अज्ञात लोगों को मणिपुर में मार दिया गया था। 4 दिसंबर सोमवार के दिन सुबह 10:30 बजे पुलिस को सूचना मिलने पर सुरक्षा बल जब  तेगनोउपल (Tengnoupal) जिले के लेतीथु (Leith ) गांव के समीप वारदात के स्थान पर पहुंचा तो सुरक्षा बलों देखा की उनकी  बॉडी पर गोलियों के निशान थे परंतु उनके आसपास किसी भी प्रकार के हथियारों की बरामद की नहीं हुई थी। यह कुकी जाती के लोगों की मेजॉरिटी वाला एरिया है। और यह वारदात की जगह म्यांमार सीमा से बहुत ही नजदीक  है। 

इस घटना की लगभग एक सप्ताह बाद PLA (People’s Liberation Army) की पॉलिटिकल शाखा RPF (The Revolutionary  People’s Front ) नए बयान जारी कर बताया की 13 लोग PLA की नई भर्ती मैं से थे। 

4 नवंबर को इधर बड़ी हिंसक गोलीबारी के बाद 13 शवों के मिलने की जानकारी 

जिनकी उम्र 17 से 47 वर्ष के बीच रही होगी। मई के महीने में इस वर्ष मणिपुर में जब जाति हिंसा  की शुरुआत हुई तब गांव के स्थानीय निवासियों ने अपने गांव की रक्षा करने  की जिम्मेदारी अपने कंधों पर पर उठाई। यह 13 लोग उन्हें स्वयं सेवकों में से एक थे जिन्होंने अपने घरों की रक्षा करते हुए अपनी मातृभूमि पर जान निछावर कर दी।

PLA की ऑफिशल वेबसाइट ऐसा दावा करती है कि इन लोगों ने मणिपुर में इस वर्ष शुरू हुई जाति हिंसा के बाद PLA ज्वाइन किया।  जब इन लोगों ने महसूस किया कि जब तक मणिपुर की खोई हुई समरूप संप्रभुता वापस नहीं मिल जाती, तब तक शांति  संभव नहीं है। PLA का मानना है कि मणिपुर में यह स्थिति भारत सरकार द्वारा निर्मित की गई है। 13 निहत्थेलोगों कि भारतीय सुरक्षा बलों और कुकीज के भाड़े भाड़े के सैनिकों ने यातना देने के बाद निर्दयता से हत्या की है। 

मणिपुर हिंसा को 7 महीने से अधिक का समय हो रहा है और दोनों समुदायों की ओर से एक दूसरे की ओर बंदूके खींची हुई है और अंतहीन नरसंहार का खेल जैसे थमने का नाम नहीं ले रहा है। मणिपुर एक बॉर्डर स्टेट होने के नाते भारत सरकार के लिए एक यह बड़ा चैलेंज बना हुआ है। अभीतक कोई ऐसे समाधान पर सर्कार नहीं पहुंची है जिससे कि यह हिंसा का दौर थम सके। 

जहां पर भारत सरकार की गलत नीतियों के कारण मणिपुर राज्य के डिस्क्रिमिनेशन का शिकार हो रहे हैं। राज्य के बहुसंख्यक मैतई लोग सबमिट कर केवल 10% एरिया में सिमट कर रहने को मजबूर हैं, और कुकी जनजाति के लोगों ने राज्य के 90% क्षेत्रफल पर काबिज़ हो चुके हैं। 

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बॉर्डर एरिया होने के वजह से पड़ोसी देशों से इस क्षेत्र में अनाधिकृत घुसपैठ कई दशकों से हो रही है। ये लोग गैरकानूनी हथियारों, कोकीन एवं अन्य नशीले पदार्थों कि तश्करी में लिप्त हैं। और यही इनलोगों के मुख्या साधन हैं।  चुकी बॉर्डर के दोनों तरफ एक ही कम्युनिटी के लोगों की बसाहट है इस वजह से आज के समय यह कहना बहुत मुश्किल है कि इनमें से कितने भारतीय नागरिक हैं और कितने पड़ोसी देशों से आए हुए अनाधिकृत घुसपैठिए हैं। और चुकी पहाड़ों पर और बॉर्डर एरिया में रहने वाले इस कुकी समुदाय को भारत सरकार की ओर से जनजाति स्टेटस प्राप्त है। जिससे कि इन्हें कुछ एक्स्ट्रा प्रिविलेज मिलते हैं। वहीं दूसरी ओर मैंने ही समुदाय भी यह मांग देश की आजादी के बाद से ही करता रहा है कि उन्हें भी जनजाति का स्टेटस दिया जाए। ऐसे में मैं दोनों ही ग्रुप अपने हितों की रक्षा करने के लिए एक दूसरे के दुश्मन हो गए। और यह दुश्मनी का मंजर आज हम सब की आंखों के सामने है। परंतु सोचने वाली बात यह है कि इस हिंसा का अंत कैसे और कब होगा। 

 

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