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बैंकिंग उद्योग (Banking Industry) में निवेश की रणनीति: Yes Bank की समीक्षा

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yes bank quarterly report

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नेट प्रॉफिट में वृद्धि : यस बैंक Yes Bank का रिव्यू

यस बैंक (Yes Bank) ने चलाया तीसरी तिमाही में ब्रह्मास्त्र

यस बैंक Yes Bank, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र (Banking Sector) का एक अहम खिलाड़ी है। हाल ही में इसने अपने तीसरे तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी किए हैं, जिसे कई विश्लेषक और मीडिया चैनलों ने “ब्रह्मास्त्र” कहा है। इस रिपोर्ट के माध्यम से हम बैंक के वित्तीय स्वास्थ्य को समझने की कोशिश करेंगे। ध्यान देने वाले मुख्य क्षेत्रों में नेट ब्याज आय (NII), गैर-ब्याज आय (NII) और प्रोविशन (Provisions) शामिल हैं, जिससे हमें बैंक की गतिशीलता का पता चल सकता है। इसके साथ ही, हमें बैंक की ओपरेटिंग लागत और लाभ पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, जिससे हमें वित्तीय चुनौतियों का सामना करने की रणनीति को समझने में मदद मिल सके।

हम यहां पर येस बैंक के तीसरी तिमाही के रिजल्ट के बारे में जानने की कोशिश करेंगे और देखेंगे की यह ब्रह्मास्त्र आखिर है क्या इसके बारे में लोग चर्चा कर रहे हैं। 

और क्या बाकी बैंकिंग क्षेत्र की कंपनियों को भी यही कदम उठाने चाहिए। 

इसके अलावा हम यह जानने की कोशिश भी करेंगे की बैंकिंग क्षेत्र के स्टॉक एस को देखने का हमारा क्या नजरिया होना चाहिए और किन-किन बातों का हमें एनालिसिस करते वक्त ध्यान रखना चाहिए। 

बैंक की इनकम के स्रोत

1st – NII (Net Interest Income Source या शुद्ध ब्याज आय)

यह बैंक की वह कमाई होती है जिसमें बैंक अपने ग्राहकों से फिक्स डिपाजिट और बचत खाते के द्वारा पैसा लेता है और वही पैसा अपने दूसरे ग्राहकों को अधिक ब्याज दर पर लोन के रूप में देता है और उसे ब्याज से बैंक को जो कमाई होती है उसे बैंकिंग भाषा में शुद्ध ब्याज आय या नेट इंटरेस्ट इनकम सोर्स कहते हैं। 

 

2nd  – Non Interest Income गैर- ब्याज आय

इस श्रेणी में बैंक की वह कमाई आती है जो बैंक अपने ग्राहकों सर्विस या लेनदेन से संबंधित सेवाओं के बदले में, वार्षिक, जमा पर्ची शुल्क जैसी अन्य और भी कई सेवाओं के शुल्क के रूप में प्राप्त करती है यह कमाई किसी भी बैंक की मुख्य आय का हिस्सा नहीं होती। 

 

तो लिए हम जानने की कोशिश करते हैं कि यस बैंक में जो ग्रोथ दिखाई है वह उसकी तीसरी तिमाही के रिजल्ट में देखकर हम समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर यह ग्रंथ ए कहां से रही है। 

 

Growth

 

Q3fy24

Q2fy24 Q3fy23 QoQ

YoY

Net Interest Income 

2017

1925 1971 4.80%

2.30%

Non Interest Income

1195

1210 1066 -1.30%

12.10%

TOTAL

3211

3135 3036 2.40%

5.80%

Operating Expance

2347

2334 2123 0.60%

10.60%

Staff cost

911

892 857 2.10%

6.20%

Other Operating Expance

1437

1442 1265 -0.40%

13.50%

Operating Profit ( Loss)

864

801 914 7.80%

-0.05

Provisions

555

500 845 10.90%

-34.30%

Prifit  Before Tax

309

301 69 2.80%

349%

Tax Expance

78

76 17 2.80%

348.50%

Net Profit

231

225 52 2.80%

349.20%

 

रिपोर्ट में देखेंगे की येस बैंक में तिमाही आधार पर फाइनेंशियल ईयर 24 की तीसरी तिमाही में बैंक ने जो नेट इंटरेस्ट इनकम 2017 करोड़ कमाया है वह पिछली तिमाही की तुलना में सिर्फ 4.8 परसेंट की ग्रोथ की है वही वार्षिक आधार पर पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष तीसरी तिमाही में ( Q3 FY 23 – 1971 Cr) सिर्फ 2.3% की ग्रोथ की है। 

चूंकि येस बैंक की टोटल इनकम में नाम मात्र ग्रोथ देखने को मिल रही है तो फिर देखना यह है कि नेट इनकम में यह एक्स्पोनेंशियल ग्रोथ कहां से आ रही है। 

 

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ऑपरेटिंग एक्सपेंस:

अब अगर ऑपरेटिंग एक्सपेंस की बात की जाए तो यह भी पिछली तिमाही (Q on Q) की तुलना में 0.6% बड़ा है। वार्षिक स्तर पर भी यह 10.6% की बढ़ोतरी हुई है। 

ऑपरेटिंग प्रॉफिट:

अगला ऑपरेटिंग प्रॉफिट जो की टोटल इनकम में से ऑपरेटिंग एक्सपेंस घटाने पर प्राप्त होता है। जो की क्वार्टर ऑन क्वार्टर के आधार पर जरूर थोड़ा सा बड़ा है जो की 7.8% है परंतु वार्षिक स्तर पर (YoY) देखा जाए तो यहां पर भी ऑपरेटिंग प्रॉफिट में – 5.4% का घाटा ही नजर आ रहा है। 

प्रॉफिट बिफोर टैक्स (profit before tax or PBT) :

किसी भी कंपनी की यह वह आय होती है जो जो आएकर भुगतान करने से पूर्व उसका मुनाफा है। 

प्रॉफिट बिफोर टैक्स क्वार्टर ऑन क्वार्टर बेसिस पर 2.8% ही बड़ा है परंतु वहीं दूसरी ओर वार्षिक स्तर पर इसमें अचानक से वृद्धि होकर यह 349% बढ़ गया है। 

 

टैक्स एक्सपेंस (Tax Expense)  कर व्यय :

तो इसमें भी हम देखेंगे कि क्वार्टर ऑन क्वार्टर (QoQ) बेसिस पर 2.8% की वृद्धि हुई जबकि ईयरली बेसिस पर 348.5% की वृद्धि दिखाई दे रही है जो कि कई गुना वृद्धि है। 

 

नेट प्रॉफिट (Net Profit) अर्थात शुद्ध लाभ :

या ग्रॉस प्रॉफिट किसी भी कंपनी का शुद्ध लाभ होता है जो उसकी कुल आय में से ऑपरेटिंग और नों ऑपरेटिंग कास्ट को माइनस करके प्राप्त होती है। 

यहां पर भी हम प्रॉफिट बिफोर टैक्स और टैक्स एक्सपेंस की तरह ही देख सकते हैं कि क्वार्टर और क्वार्टर बेसिस पर 2.8% की वृद्धि हो रही है और वार्षिक या एयर ओं एयर बेसिस पर 349.2% नेट प्रॉफिट निकाल कर आ रहा है। 

तो इधर एनालिसिस करने वाली बात यह है की यह नेट प्रॉफिट इतने गुना बढ़कर क्यों आ रहा है जबकि बाकी सारी जगह ग्रोथ नेगेटिव में दिखाई दे रही है। 

यहां पर हम देख सकते हैं कि प्रोविजंस (Provisions) मैं क्वार्टर ऑन क्वार्टर बेसिस पर 10.9% की वृद्धि दिखाई दे रही है परंतु वार्षिक आधार पर नेगेटिव ग्रोथ – 34.3% हुई है। 

प्रोविजंस (Provisions) :

प्रोविजंस  एक प्रावधान  के तौर पर कंपनी अपने प्रॉफिट में से कुछ फंड बचा कर रखती है अनएक्सपेक्टेड खर्चो के लिए यह मिसलेनियस एक्सपी जिनका पहले से अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। 

प्रोविजंस बैंकिंग प्रणाली में और बैंकिंग स्टॉक को एनालाइज करने में एक की फैक्टर का काम करता है और जब भी हम किसी बैंक की वार्षिक रिपोर्ट देखते हैं तो हमें इससे कई चीजे जैसी यह बैंक की हेल्थ को इंडिकेट करता है। 

हम यहां पर है यदि यस बैंक की बात करें तो क्वार्टर ऑन क्वार्टर बेसिस पर तो प्रोविजंस में 10.9% की वृद्धि हुई है परंतु वार्षिक स्तर पर इसमें -34.3% की गिरावट आई है। 

तो हम यहां यह कह सकते हैं कि यस बैंक में जो नेता ग्रोथ कई गुना होकर दिख रही है यह नेट इनकम में या फिर ऑपरेटिंग प्रॉफिट में ग्रंथ की वजह से नहीं है बल्कि प्रोविजंस में आई लगभग 300 करोड़ की गिरावट की वजह से यह येस बैंक की नेट प्रॉफिट रिपोर्ट में दिखाई दे रही है। 

अब प्रश्न यह है कि येस बैंक की यह ग्रोथ जो की प्रोविजंस को कम करने से उसके नेट प्रॉफिट में रिफ्लेक्ट हो रही है सही है?

बैंकिंग सिस्टम में प्रोविजंस एक इंपॉर्टेंट पैरामीटर होता है जो बैंक की हेल्थ की तरफ इशारा करता है यह हमें यह बताता है कि बैंक आने वाले समय के लिए अपने प्रॉफिट में से कितना पैसा एक साइड में रखता है भविष्य में होने वाले बेड लोन या एनपीए के लिए। 

क्योंकि अगर हम बैंकिंग सिस्टम को समझने की कोशिश करें तो एक बैंक कार्य कैसे करता है। एक तरफ वह अपने कस्टमर से पैसा लेता है कम ब्याज दर पर और दूसरे जरूरतमंद कस्टमर को पैसा देता है लोन के रूप में अधिक ब्याज दर पर। इस में से कुछ कस्टमर ऐसे भी होते हैं जो बैंक का लोन चुकाने में असमर्थ होते हैं उसे बैंक बेड लोन या एनपीए में डाल देता है। 

चुकी बैंक अपने खाता धारकों को उनका पैसा ब्याज के सहित वापस करने के लिए बाधित है इसलिए वह अपने प्रॉफिट में से प्रोविजंस के रूप में कुछ अमाउंट अलग निकाल कर रखता है कि ऐसी स्थिति में वह अपने खाता धारकों के पैसे का ख्याल रख सके। 

और अगर बैंकिंग प्रणाली में किसी बैंक के प्रोविजंस काम होते हैं इसका अर्थ यह लगाया जाता है की बैंक के NPA और बेड लोन काम हो गए हैं जो किसी भी बैंक के लिए एक बहुत ही अच्छा माना जाता है। 

 

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