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नए कानून के तहत ड्राइवरों को 10 साल की सजा और 7 लाख रुपए का जुर्माना का प्रावधान : सर्कार समझौते को तैयार

ड्राइवर हड़ताल

ड्राइवरों की हड़ताल (Driver’s Strike) पर सरकार की तरफ से गृह सचिव अजय भल्ला (Ajay Bhalla) ने ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस

के साथ बैठक की और कहा कि-

सरकार यह बताना चाहती है कि यह नए कानून और प्रावधान अभी लागू नहीं हुए हैं हम यह भी बताना चाहते हैं कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(2) को लागू करने से पहले ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस से विचार विमर्श करने के पश्चात ही इस कानून को लागू किया जाएगा। हम ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस एवं सभी मोटर चालकों से आवाहन करते हैं कि आप अपने-अपने कामों पर वापस

ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस  (AIMPC) के चेयरमैन बलबीर सिंह (Balveer Singh) ने ड्राइवरों से बिना किसी डर के काम पर लौट जाने की अपील की और कहा की

“ गलतफहमी थी जो कि हमारे भाई कहीं ना कहीं गुमराह हो रहे थे समझ नहीं पा रहे थे आज सरकार की तरफ से इसका स्पष्टीकरण गया है हमारी तरफ से स्पष्टीकरण दिया हुआ है हम कंस्ट्रक्टिव डायलॉग में विश्वास रखते हैं और कंस्ट्रक्टिव डायलॉग के माध्यम से इसका हल निकाला है जो आपको हमने बताया है कि यह आज कानून लागू नहीं है और यह कानून लागू नहीं होने देंगे ”

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ट्रांसपोर्ट कमिश्नर 

ने ड्राइवर एसोसिएशंस और ट्रांसपोर्टर को भरोसा दिलाते हुए वापस कम पर आने को कहा। सरकार ने बयान देते हुए यह कहा है कि हमारे ट्रक ड्राइवर भाई कहीं ना कहीं गुमराह है क्योंकि ऐसा कोई भी कानून उनको भरोसे में लिए बिना लागू नहीं किया जाएगा। 

यह सरकार और ड्राइवर दोनों पक्षों के बीच में मीटिंग। 

स्थिति पर दो दिन तक सरकार ने नजर रखी और स्थिति को देखते हुए पक्ष से जुड़े हुए लोगों को मीटिंग के लिए बुलाया गया। ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस संगठन के सदस्यों के साथ देश के गृह सचिव अजय भल्ला ने मीटिंग की और इस कानून को लेकर पैदा हुई असमंजस की स्थिति को स्पष्ट किया गया। 

आखिर ऐसा क्या था इस कानून में जिसके डर की वजह से देश के सभी ड्राइवर ने रोड पर अपने वाहन लेकर उतरने से मना कर दिया।  

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इस नए कानून के अनुसार :

हित ओर रन मामले में एक्सीडेंट में हुई मौत को लेकर कुछ नए प्रावधान किए गए हैं 

अगर एक्सीडेंट के बाद ड्राइवर अगर पुलिस को खबर किए बगैर भगत है। और दुर्घटना में अगर किसी की मौत हो जाती है तो उसे स्थिति में ड्राइवर को 10 साल की सजा।  और सात लाख रुपए का जुर्माना का प्रावधान है। 

वहीं दूसरी और ड्राइवर का कहना है की दुर्घटना के पश्चात अगर वह लोग दुर्घटना के स्थान पर रुकते हैं तो उनको उसे स्थान के प्रवासियों के गुस्से का शिकार होने का खतरा है। 

अभी क्या है कानून

अभी तक इस तरह की दुर्घटनाओं में 2 साल तक की सजा का प्रावधान है

समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग 80 80 लाख ड्राइवर एवं 95 लाख ट्रक है जो देश की जरूरत के हिसाब से सामान को देश के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक पहुंच जाते हैं। ड्रिवेरों के हड़ताल पर जाने से सभी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं । बहुत से पेट्रोल पंप सूख चुके हैं, दो दिन मशीन ही सब्जियां भी मंहगी होगी हैं दूध की किल्लत होगी है। परन्तु सर्कार की पहल से ड्राइवर अपनी हड़ताल से वापस कर आजायेंगे और कल से दोबारा जनजीवन पटरी पर लौटने की उम्मीद है। 

सर्कार के द्वारा लिया गया ये कदम बेशक आम आदमी की भलाई के लिए लिया गया फैसला था। मगर इसमें निरंकुशता की बू आ रही थी। क्यों की लोकतंत्र मैं कोई भी सर्कार केवल एक पक्ष के तरफ से नहीं सोच सकती है और नहीं फैसले ले सकती है। इसलिए इस कानून मैं ड्रिवेरों के पक्ष को अनदेखा करने की वजह से देश मैं दो दिन तक लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सारांश

क्योंकि इसका दूसरा पहलू ये है की कोई व्यक्ति समझ-बूझ कर तो एक्सीडेंट करता नहीं है। परिस्तिथिवश कोई भी इसका शिकार हो सकता है । इसमें गलती छोटे वहां वाले की भी हो सकती है और बड़े वहां वाले की भी । परन्तु हमेशा जनता के रोष का सामना बड़े वहां वाले पर ही उतरता है । ऐसी इस्तिथि में सामान्य तौर पर घटना स्थल पर लोग भावनात्मक हो जाते हैं जिससे सही गलत का फैसला करने में असमर्थ होते हैं जिसका खामियाजा अक्सर ड्राइवर्स को उठाना पड़ता है। जिसमें अगर ड्राईवर घटना स्थल पर रुकता हैं तो उसे जान का खतरा भी होता है।

डूडसरा कारण ड्राईवर एक आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग का होता है। जिसके लिए 7 लाख रुपये बहुत बड़ी राशि होती है।

इस हड़ताल ने दिखाया कि ड्राइवरों की समस्याओं और नए कानूनों के बीच एक सही समझौता आवश्यक है। सरकार की ओर से आये बयानों ने स्पष्ट किया है कि नए कानूनों को लागू करने से पहले सभी स्तरों पर विचार-विमर्श होगा और उनके प्रभाव को समझने के लिए समय दिया जाएगा। ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस और सरकार के बीच हुई मीटिंग ने एक कंस्ट्रक्टिव डायलॉग की दिशा में कदम बढ़ाया है जिससे समस्याओं का सही समाधान हो सकता है।

यह घटना साबित करती है कि सार्वजनिक बातचीत और समझदारी के माध्यम से ही समस्याओं का हल निकल सकता है। ड्राइवरों और सरकार के बीच एक साथी समझौता से ही सड़कों पर सुरक्षा और यातायात को सावधानी पूर्वक चलाने का रास्ता खुल सकता है। इस मामले में बिना किसी डर और संतुलन के साथ किए जा रहे संवाद ने दिखाया है कि समाधान संभव है और सभी पक्षों को साथ मिलकर काम करने की आवकश्यकता हैं ।

FAQ:

1. ड्राइवर हड़ताल क्यों हुआ?

ड्राइवरों का हड़ताल नए कानूनों के प्रति आपत्ति का प्रतीक था, जो हिट एंड रन मामलों में एक्सीडेंट के बाद ड्राइवरों को कड़ी सजा देने का प्रावधान करते थे। इससे उन्हें लगा कि यह कानून उनके अधिकारों को छूने का खतरा बना सकता है।

2. सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने ड्राइवरों को यह समझाया कि नए कानूनों को लागू करने से पहले सभी स्तरों पर चर्चा कर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा और उनके सुझावों को गंभीरता के साथ सुना जाएगा।

3. क्या ड्राइवरों के हड़ताल का समापन हुआ है?

हां, सरकार और ड्राइवर संघ के बीच हुई मीटिंग ने समस्याओं का हल निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है, और ड्राइवरों ने हड़ताल समाप्त कर दी है।

4. नए कानून क्या कहते हैं?

नए कानून में हिट एंड रन मामलों में हुई मौत पर सजा के प्रावधान हैं। ड्राइवर अगर एक्सीडेंट के बाद पुलिस को खबर किए बगैर भागता है और दुर्घटना में किसी की मौत होती है तो उसे 10 साल की सजा और 7 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है।

5. क्या यह हड़ताल जनजीवन पर कैसा प्रभाव डाला?

हड़ताल से लगभग सभी सेवाएं प्रभावित हुईं, जैसे कि पेट्रोल पंप सूख गए, और दूसरी सामग्रीयां मंहगी हो गईं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बच्चे स्कूल नहीं जा पाए ।

6. क्या समझौता सही समाधान है?

हां, ड्राइवरों और सरकार के बीच हुआ समझौता सही दिशा में कदम बढ़ाने का संकेत है। सही समझदारी और सार्थक बातचीत से ही समस्याओं का हल संभव है।

 

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