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प्राइवेट बिल पेश: वक़्फ़ बोर्ड को समाप्त करने की योजना

प्रस्ताव कैसे आया 

         

Pratham Kiran
हरनाथ सिंह यादव

     

“जब देश का विभाजन हुआ तब ये तय हुआ कि जो पाकिस्तान से हिन्दू आएगा भारत तो उसकी संपत्ति पाकिस्तान कि होगी और जब कोई मुस्लिम यहाँ भारत से पाकिस्तान जायेगा उसकी संपत्ति भारत कि हो जायेगी। “

 

 

“यह विषय जमीन हड़पने के साथ-साथ धर्मांतरण का भी है और वह भी बड़े स्केल पर। “

 

 

   

 

 

राज्य सभा सांसद हरनाथ सिंह यादव  ने राज्य सभा सांसद से परमिशन मांगी की क्या मैं ये प्रश्ताव पेश कर सकता हूँ क्या ? तो राज्य सभा मैं इस प्रश्ताव के पक्ष में 52 और विपक्ष में 32 वोट पड़े । इसका आशय है कि अब वे प्रस्ताव पेश कर सकते हैं जिस पर सदन में चर्चा और विचार विमर्श होगा उसके बाद उस प्रस्ताव (bill) पर वोटिंग होती है। 

हरनाथ सिंह यादव  ने प्रश्तावना के तौर पर इस पर कहा कि – 1995क्फ बोर्ड अधिनियम (waqf bord act ) से देश में असमानता फैली हुई है और वहीँ बड़े स्टार पर धर्मांतरण का खेल भी इसकी आड़ में चल रहा है । 

1995 में जब यह बिल पास हुआ तब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी और PV Narasimha Rao  (Pamulaparthi Venkata Narasimha Rao ) देश के 9 में प्रधानमंत्री के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। 

आगे उन्होंने कहा कि – जब देश का विभाजन हुआ तब ये तय हुआ कि जो पाकिस्तान से हिन्दू आएगा भारत तो उसकी संपत्ति पाकिस्तान कि होगी और जब कोई मुस्लिम यहाँ भारत से पाकिस्तान जायेगा उसकी संपत्ति भारत कि हो जायेगी।  इस बात को बता देते हुए मुस्लिम मां ने एक वक्त बोर्ड नाम की संस्था बनाई और उसकी 1954 में कांग्रेस ने kanooni मान्यता देदी। फिर जितनी संपत्ति उसे वक्त भारत से गए मुसलमानों की थी उसमें से 90% संपत्ति वक्फ बोर्ड की हो गई। फिर 1995 में कांग्रेस सरकार ने एक वक्फ बोर्ड एक्ट 1995 बनाया। इस वक्त बोर्ड एक्ट में कुल 7 लोग होंगे जिसमें से पांच मेंबर होंगे, एक sarveyar होगा, एक कार्य अधिकारी होगा और सभी मुस्लिम होंगे। 

हरनाथ सिंह यादव  जी ने आगे सदन को बताया की – इस वक्फ बोर्ड की ताकत यह है कि इस बोर्ड के मेंबर सर्वे या कार्य अधिकारी किसी भी संपत्ति को बोल देंगे कि यह संपत्ति उनकी है तो बोर्ड को यह साबित करने की जरूरत नहीं कि उसकी वह संपत्ति है या नहीं बल्कि जिस शख्स के पास वह मौजूद है वह सिद्ध करें कि यह संपत्ति उसकी है। यह सब होगा उसे आदमी के आदेश पर जी सरवर या कार्य अधिकारी ने यह आदेश दिया है। इस एक्ट में यह भी प्रावधान है कि वक्फ बोर्ड के इस फैसले को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती चाहे उच्च न्यायालय हो या उच्चतम न्यायालय। 

उदाहरण के तौर पर इस अनुसार यदि आपकी किसी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड दावा कर दिया कि वह संपत्ति वक्फ बोर्ड की है तो उस स्थिति में  ये जुम्मेदारी आपकी होगी की आप सिद्ध करें की वो संपत्ति आपकी कैसे है, ना कि वक्त बोर्ड की। अगर आप अपना मलिक आना हक सिद्ध करने में नाकामयाब रहे तो वह संपत्ति वक्फ बोर्ड की हो जाएगी।

 दूसरे शब्दों में बख़्फ बोर्ड अगर कहता है कि वह जमीन उसकी है इसका मतलब वह जमीन उसकी है आपको ही सिद्ध करना पड़ेगा और डॉक्यूमेंट प्रोड्यूस करने पड़ेंगे कि नहीं वह जमीन आपकी है, अन्यथा जमीन या प्रॉपर्टी बख़्फ की हो जाएगी। 1995 वक्फ अधिनियम बोर्ड को ये ताकत देता है कि बोर्ड के फैसले को आप किसी भी न्यायालय में चैलेंज नहीं कर सकते। इसका मतलब यह हुआ कि इस कानून ने फकफ बोर्ड को भारतीय न्यायालय से भी ज्यादा ताकतवर बना दिया या उससे भी ऊंचा दर्जा दे दिया। 

इस पर राज्यसभा सांसद हरनाम सिंह यादव जी ने कहा कि – यदि किसी भी चीज को उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में चुनौती ही नहीं दी जा सकती तो हम कैसे कह सकते हैं कि हमारे देश में रूल आफ लॉ है (कानून का राज है )।  

इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाते हुए यादव जी ने दो उदाहरण भी पेश किया जिसमें एक तमिलनाडु राज्य का है और दूसरा महाराष्ट्र के सोलापुर जिले का है –

हरनाथ सिंह जी ने कहा कि – उनके पास ऐसे सैकड़ो कैसे आए हैं जिसमें बॉक्स ने लोगों की संपत्तियां ले ली है उन्हें दो घटनाओं का जिक्र करते हुए यह वाक्य समझाया एक वाक्य उन्हें तमिलनाडु प्रदेश के trichi जिले के गांव का बताया जहां डेढ़ हजार आबादी है कुल मिलाकर और मात्र सात आठ घर मुसलमान के हैं और वहां पर एक शंकर जी का मंदिर है जो डेढ़ हजार वर्ष पुराना है। बख़्फ मैं उसे गांव की संपत्ति पर अपना दावा ठोक दिया है और सबको खाली करने का नोटिस कलेक्टर के यहां से आ गया है। कागज से भी संपत्ति खारिज हो गई है। इसमें गांव की अधिकतर आबादी गरीब है। बाद में जब लोग थक हार गए तो उन्हें एक ऑप्शन देते हुए मुस्लिम धर्म स्वीकार करने का सुझाव दिया गया कि अगर वह ऐसा कर लेंगे तब उनकी जमीन बच जाएगी। 

इसी तरह से महाराष्ट्र की भी एक घटना का उदाहरण देते हुए सांसद हरनाम सिंह यादव ने सदन को बताया की महाराष्ट्र के सोलापुर जिले का वाक्या है जहां एक बस्ती में ढाई सौ करीब अनुसूचित वर्ग के लोग हैं।  उनके पास एक नोटिस उनकी जमीन को खाली करने के लिए आया कि वह जहां रह रहे हैं वह बख़्फ की प्रॉपर्टी है। वह दर-दर भटके तो उनको भी इस्लाम धर्म अपनाने का ऑफर किया गया। हरनाथ सिंह यादव ने कहा की यह विषय जमीन हड़पने के साथ-साथ धर्मांतरण का भी है और वह भी बड़े स्केल पर। 

 

वक्फ और बख़्फ बोर्ड क्या है ?

हमारे देश भारत में अबू युसूफ की दी गई परिभाषा को  हनफी की विधि में माना गया है। अबू युसूफ लिखते हैं कि संपत्ति को सर्वशक्तिमान अल्लाह के स्वामित्व के अंतर्गत स्थित कर देना तथा उसके लाभ या उत्पादों को मानव जाति के लाभ के लिए लगाना बख़्फ है। 

खुदा के नाम पर दान की हुई वस्तु या संपत्ति। 

सामान्य समझ के लिए बख़्फ शब्द का अर्थ किसी भी धार्मिक काम के लिए किया गया कोई भी दान होता है यह दान पैसे, संपत्ति, या काम का हो सकता है। 

कानून के अनुसार इस्लाम को मानने वाले किसी भी इंसान का धर्म के लिए किया गया किसी भी तरह का दान बक्स कहलाता है। 

इसके अलावा अगर किसी संपत्ति को लंबे समय तक धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग किया जाता रहा है तो उसे भी बख़्फ माना जा सकता है। इस तरह से लंबे समय से धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल की जा रही जमीने भी वक्त की ही प्रॉपर्टी है जैसे मस्जिद, majharen या फिर जितने भी कब्रिस्तान बगैर है सब बख़्फ के अंदर ही गिना जाता है। 

बख़्फ शब्द को इस्लाम से जुड़ी जुड़ी हुई शैक्षणिक संस्थान, कब्रस्तान, मस्जिद, धर्मशालाओं के लिए भी किया जाता है। 

अगर कोई किसी संपत्ति को एक बार बख़्फ कर देता है तो उसे वापस नहीं किया जा सकता। 

गैर मुस्लिम भी बख़्फ कर सकता है लेकिन उसकी इस्लाम में आस्था होनी जरूरी है और बख़्फ करने का उद्देश्य भी उसका इस्लामी होना चाहिए। 

यहां तक की पार्टीशन के समय पाकिस्तान चले गए मुसलमानों की जमीन भी बख़्फ की प्रॉपर्टी है। इस वजह से आज बख़्फ बोर्ड लाखों एकड़ जमीन पर अपना दावा ठोकता है। 

क्या-क्या बख़्फ किया जा सकता है

 

इस्लाम में कोई भी व्यक्ति वक्त कर सकता है इसके अंतर्गत नीचे दिए गई संपत्तियों को बख़्फ किया जा सकता है। 

चल संपत्ति

इस्लाम में बख़्फ कोई भी व्यक्ति अपनी जल संपति जैसे धन कंपनी या कंपनी के शेयर किसी भी प्रकार की चल संपत्ति बख़्फ कर सकता है

अचल संपत्ति

इस्लाम में वक्त के अंतर्गत सभी मुस्लिम व्यक्ति अपनी अचल संपत्ति जैसे जमीन जायदाद घर बिल्डिंग यह इसी प्रकार की अन्य अचल संपत्ति बख़्फ करने का प्रावधान है। 

अन्य

इस्लाम में वक्त के अंतर्गत सभी मुसलमान अपने द्वारा उपयोग की गई अन्य प्रकार की चीज भी दान कर सकते हैं। कोई व्यक्ति अगर चाहे तो अपनी कर बख़्फ कर सकता है या अपनी किताबें बख़्फ कर सकता है। 

वक्त संपत्ति को दो प्रकार से दिया जा सकता है या तो उन संपत्ति का पूरा उपयोग धार्मिक कार्यों में किया जा सकता है। या फिर किसी संपत्ति या किसी संस्थान की आय में से एक निश्चित हिस्सा बख़्फ किया जा सकता है और एक निश्चित हिस्सा वह अपने अपने परिवार के भरण पोषण के लिए रख सकता है। 

 

राज्य सभा मैं 8 दिसंबर 2023 को एक प्राइवेट बिल लाया गया की वक़्फ़ बोर्ड को हटा देना चाहिए

वक़्फ़ का शब्दि अर्थ होता है “दान किया हुआ “

वक़्फ़ बोर्ड का इतिहास 

बख़्फ की अवधारणा बहुत पुरानी है परंतु कुरान में ऐसी कोई आयात नहीं है  जो सीधी तौर पर वक्त से संबंधित हो। बख़्फ की हर अवधारणा को विभिन्न हदीसों से लिया माना जा सकता है। और ऐसा कहा जाता है की सबसे पहला बख़्फ मोहम्मद साहब के समय 600 खजूर के पेड़ों का किया गया था। 

पारंपरिक तौर पर यह भी कहा जाता है कि इब्न उमर मोहम्मद साहब के पास गए और कहा कि वह जमीन का एक हिस्सा दान करना चाहते हैं आप ही कुछ सलाह दें तो मोहम्मद ने कहा कि यदि वह चाहे तो संपत्ति को आविभाज्य (inalienable) भी बना सकते हैं और उससे होने वाले लाभ को लोगों की भलाई में खर्च कर सकते हैं। उसे संपत्ति को किसी को भेजा नहीं जाएगा विरासत में नहीं दिया जाएगा या फिर उसका कोई संपत्ति पर हक नहीं होगा जो संपत्ति ही देखभाल कर रहा होगा। हां संपत्ति से हुई आए मैसेज कुछ हिस्सा वह अपने उपयोग के लिए रख सकता है या फिर अपने किसी मित्र को उसमें से कुछ हिस्सा दे सकता है लेकिन वह मित्र उसे लाभ से अपने को समृद्ध ना कर रहा हो। 

जब से मुस्लिम्स भारत मैं आये तभी से वक्फ करते आये हैं परन्तु कानूनी तौर पर पहली बार  सन 1810 मैं पहिली बार इसका उल्लेख मिलता है। उसके बाद समयसमय पर जैसे  1863 में, 1890 मैं,  1934 में इसमें सुधर होता रहा है।

1863 मैं पुराने सभी कानूनों को रद्द कर दिया गया और वक्फ की संपत्ति मतवल्लियों को सौंप कर शेष संपत्ति अंग्रेजी हुकूमत के देखरेख में आ गई।   बाद  अंग्रेजों ने जमीने हड़पने के उद्देश्य से

टेरिटोरियल इंडाउमेंट एक्ट, 1890 (Territorial Endowments Act, 1890) एक कानून लेकर आये। जो धार्मिक स्थलों और संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण के लिए बनाया गया है। यह कानून साम्राज्यवाद के दौरान बनाया गया था और इंडिया को ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत लाया गया था।

इस कानून का मुख्य उद्देश्य धार्मिक स्थलों की संरक्षण और प्रबंधन में सुधार करना था। यह धार्मिक स्थलों को सही से चलाने और संरक्षित रखने के लिए निर्दिष्ट नियमों और विधियों की प्रदान करता है।  ……….

 

चूँकि देश का बटवारा धर्म के आधार पर हुआ था जिसमें मुस्लिम्स की मांग पर अलग मुस्लिम देश पाकिस्तान बनाया गया और हिन्दुओं के लिए हिंदुस्तान (भारत)।

वक्फ अधिनियम 1954:

1954 का वक़्फ़ अधिनियम एक ऐसा कानून है जो भारत में वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रबंध से संबंधित है। “वक़्फ़” एक मुस्लिम धर्म से संबंधित धरोहर को सूचित करता है, जिसमें मुस्लिम धर्मिक और मुसलमानो के सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संपत्ति का  आदान-प्रदान किया जाता है। 1954 का वक़्फ़ अधिनियम, भारत में वक़्फ़ों के ठीक-से प्रबंधन और निगरानी को सुनिश्चित करने के लिए पारित किया गया था।

यहाँ कुछ मुख्य बिंदुएँ हैं जो 1954 के वक़्फ़ अधिनियम के बारे में हैं:

  1. लक्ष्य:
    • वक़्फ़ अधिनियम का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के लाभ के लिए वक़्फ़ संपत्तियों के उच्च प्रबंधन और उपयोग को सुनिश्चित करना है।
  2. वक़्फ़ ट्रिब्यूनल:
    • यह अधिनियम एक वक़्फ़ ट्रिब्यूनल स्थापित करता है जो वक़्फ़ संपत्तियों से संबंधित विवादों का समाधान करने के लिए है। ट्रिब्यूनल को मुतवल्लियों (प्रबंधक) और लाभार्थियों के अधिकार और कर्तव्यों से संबंधित मामलों का न्याय करने का अधिकार है।
  3. वक़्फ़ बोर्ड:
    • यह अधिनियम प्रत्येक राज्य में राज्य वक़्फ़ बोर्ड की स्थापना के लिए प्रावधान करता है, जो अपने क्षेत्र में वक़्फ़ संपत्तियों का नियामक हैं। केंद्र सरकार को भी केंद्रीय वक़्फ़ बोर्ड स्थापित करने का अधिकार है।
  4. वक़्फ़ों का पंजीकरण:
    • इस अधिनियम ने वक़्फ़ों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया है ताकि इन धार्मिक धरोहरों का एक रिकॉर्ड बना रहा जा सके। पंजीकरण प्रक्रिया में संपत्तियों, उनके उद्देश्यों और उनके प्रबंधन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विवरण प्रदान करना शामिल है।
  5. वक़्फ़ बोर्ड की शक्तियाँ और कार्य:
    • वक़्फ़ बोर्ड को विभिन्न शक्तियाँ और कार्य होते हैं, जिसमें पंजीकृत वक़्फ़ संपत्तियों का प्रबंधन, वक़्फ़ हितों की सुरक्षा, और विवादों का समाधान शामिल हैं
  1. न्याय और निरीक्षण:
    • अधिनियम वक़्फ़ बोर्ड को वक़्फ़ संपत्तियों के लेखा और निरीक्षण का प्राधिकृतिकरण करने का अधिकार प्रदान करता है ताकि इनके प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
  2. संशोधन:
    • वक़्फ़ अधिनियम ने समय-समय पर उठने वाले मुद्दों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए संशोधन किया जाता रहा है।

वक्फ अधिनियम 1995 :

मुकद्दस वक़्फ़ अधिनियम 1995 भारत में वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रबंध से संबंधित मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक कानून है। इसे मुकद्दस वक़्फ़ अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है। यह कानून पहले से ही मौजूद वक़्फ़ अधिनियम 1954 को संशोधित करने के उद्देश्य से बनाया गया था।

यहाँ मुकद्दस वक़्फ़ अधिनियम 1995 के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान हैं:

  1. प्रमुख बदलाव:
    • यह अधिनियम 1995 में वक़्फ़ों के प्रबंधन और संरचना में सुधार करने के लिए किया गया था। इसमें 1954 के अधिनियम की तुलना में कई बदलाव किए गए थे।
  2. वक़्फ़ ट्रिब्यूनल:
    • यह अधिनियम वक़्फ़ ट्रिब्यूनल की स्थापना करता है, जो वक़्फ़ संपत्तियों से संबंधित विवादों का निर्णय करने के लिए है।
  3. मुतवल्ली (प्रबंधक) की नियुक्ति:
    • अधिनियम ने मुतवल्ली की नियुक्ति के लिए निर्दिष्ट नियमों और शर्तों को निर्धारित किया है।
  4. वक़्फ़ विभाग:
    • राज्य सरकारों ने वक़्फ़ विभाग स्थापित किये गए हैं जो वक़्फ़ों के प्रबंधन, निगरानी, और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।
  5. वक़्फ़ की पंजीकरण:
    • अधिनियम वक़्फ़ों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है ताकि इन संपत्तियों का सही प्रबंधन हो सके और इसमें सुधार हो सके।

 

नोट – ध्यान देने योग्य है कि प्रदान की गई जानकारी सामान्य ओवरव्यू है, और विशिष्ट विवरण, सबसे सटीक और अपडेटेड जानकारी के लिए, वक़्फ़ अधिनियम के नवीनतम संस्करण का संदर्भ करें या भारतीय कानूनों के जानकारों से परामर्श करें।

 

ये कलम अपडेट किआ जा रहा है   …………….

 

 

वक्फ  कितने बोर्ड हैं

भारत देश में कल 32 राज्य स्तरीय वक्फ बोर्ड हाय बोर्ड है और एक केंद्रीय स्तर पर स्वतंत्र संस्था है सेंट्रल वक्फ काउंसिल जो कि वक्फ की संपत्तियां की सुरक्षा का कार्य करती है S

 

वक़्फ़ बोर्ड के पास संपत्ति कितनी है ?

वक्फ बोर्ड भारत देश मैं तीसरे नंबर का सबसे बड़ा संम्पत्ति का मालिक है।

  1. नंबर पर भारतीय सेना के पास 17 . 95 लाख एकड़ जमीन है।
  2. दूसरे नंबर पर भारतीय रेल के पास 11.78 लाख एकड़ जमीन है। और
  3. तीसरे नंबर पर वक्फ बोर्ड है जिसके पास 8.7 लाख सम्पत्तियों मैं लगभग 94.4 लाख एकड़ जमीन है। 

 

 

State/UT Waqf Boards-wise details of immovable Waqf properties registered on WAMSI portal

This information was given by the Union Minister for Minority Affairs Shri Mukhtar Abbas Naqvi in a written reply in the Rajya Sabha today.

 

1. | अंडमान और निकोबार द्वीप                              | 150

2. | आंध्रा  प्रदेश                                                     | 10708

3. | आसाम                                                            | 1616

4. | बिहार  (Shia)                                                 | 1672

5. | बिहार  (Sunni)                                              | 6480

6. | छतीसगड़                                                        | 34

7. | छतीसगड़                                                        | 2665

8. | दादर और नगरहवेली                                      | 32

9. | दिल्ली                                                             | 1047

10. | गुजरात                                                         | 30881

11. | हरयाणा                                                         | 23117

12. | हिमाचल प्रदेश                                               | 4494

13. | झारखण्ड                                                       | 435

14. | जम्मू एंड कश्मीर                                            | 32506

15. | कर्नाटक                                                         | 58578

16. | केरल                                                             | 49019

17. | लक्षदीप                                                          | 896

18. | मध्य प्रदेश                                                     | 31342

19. | महाराष्ट्र                                                         | 31716

20. | मणिपुर                                                         | 966

21. | मेघालय                                                         | 58

22. | ओडिशा                                                        | 8510

23. | पांडिचेरी                                                       | 693

24. | पंजाब                                                           | 58608

25. | राजस्थान                                                      | 24774

26. | तमिलनाडु                                                    | 60223

27. | त्रिपुरा                                                           | 2643

28. | तेलंगाना                                                       | 41567

29. | उत्तर प्रदेश (Sunni)                                   | 199701

30. | उत्तर प्रदेश(Shia)                                       | 15006

31. | उत्तराखंड                                                     | 5317

32. | पश्चिम बंगाल                                                | 80480

Total |                                                                | 785934

 

नोट – ऊपर दिया गया  डाटा 2022 का है इसलिए कुछ असमानता हो सकती है। अपडेटेड जानकारी के लिए आप मिनिस्टरी फॉर  माइनॉरिटी  अफेयर्स  मैं संपर्क कर सकते हैं या उनकी वेबसाइट विजिट कर सकते हैं।

FAQ 

  प्राइवेट बिल क्या होता तै ?

भारत देश की संसद मैं दो सदन होते हैं लोकसभा और राज्य सभा । सदन मैं जब कोई सांसद प्रश्न पूंछता है तो मंत्री परिषद सर्कार की ओर से उसका जबाब देती है। और अगर कोई प्रस्ताव रखा जाता है , तो वो दो तरह से रखा जाता है । 

  1. गवर्नमेंट बिल : ऐसा बिल जो मंत्री परिसद की ओर से लाया जाता है तो वो गोवर्ण बिल कहलाता है। 
  2. प्राइवेट मेंबर बिल : जब कोई सांसद जो मंत्री परिसद (Councile of Minister ) का हिस्सा नहीं है चाहे सत्ता पक्ष से या विपक्ष से यदि संसद मैं कोई प्रस्ताव लता है तो उसे प्राइवेट बिल कहा जाता है  

Q: भारत में सबसे ज्यादा जमीन किसके पास है? 

   ( Largest land holder in India ?)

A: भारत में सबसे अधिक जमीन भारतीय सेवा के पास उसके बाद दूसरे स्थान पर भारतीय रेल का आता है और तीसरे स्थान पर वक्त बोर्ड है जिसके पास हमारे देश में सबसे ज्यादा जमीन है। 

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आज भी कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी का कार्यालय मुसलमानों को समर्पित भूमि पर स्थापित है. मिसाल के तौर पर पटना का सदाक़त आश्रम मौलाना मज़हरूल हक़ की वक़्फ़ की गई ज़मीन पर क़ायम है.

Credits:

ABP  न्यूज़ ,

 

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