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कंस्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से समझें भारतीय महंगाई का स्तर

नेशनल स्टैटिकल ऑफिस ( NSO) नए शुक्रवार शाम 5:30 बजे अपने आंकड़े जारी किए। इनकी रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का रिटेल इन्फ्लेशन अर्थात महंगाई दर दिसंबर में बढ़कर 5.69% पर पहुंच गई जो नवंबर में 5.5% थी। महंगाई इधर अक्टूबर में रिटेल महंगाई 4.87% थी जिसका मतलब है कि पिछले लगातार तीन महीना से महंगाई दर में वृद्धि हो रही है। क्या है मंहगाई दर या कंस्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI), इसे आप खुद कैलकुलेट कर सकते हैं।   

नेशनल स्टैटिकल ऑफिस की मंहगाई दर पर रिपोर्ट 12.01.2024

NATIONAL STATISTICAL OFFICE

CPI

नेशनल स्टैटिकल ऑफिस ( NSO) नए शुक्रवार शाम 5:30 बजे अपने आंकड़े जारी किए। इनकी रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का रिटेल इन्फ्लेशन अर्थात महंगाई दर दिसंबर में बढ़कर 5.69% पर पहुंच गई जो नवंबर में 5.5% थी। महंगाई इधर अक्टूबर में रिटेल महंगाई 4.87% थी जिसका मतलब है कि पिछले लगातार तीन महीना से महंगाई दर में वृद्धि हो रही है। 

अब सवाल यह है कि महंगाई क्यों हो रही है और इन आंकड़ों का अर्थ क्या है। 

भारत में इसको कैसे कैलकुलेट किया जाता है:

अब किसी भी उत्पाद का लाइफ साइकिल क्या है यह देखते हैं सर्वप्रथम एक मैन्युफैक्चरर उत्पाद बनाता है वह उत्पाद होलसेलर के पास पहुंचता है उसके बाद वह उत्पाद रिटेलर के पास पहुंचता है और रिटेलर से अंत तक कस्टमर तक पहुंचता है। 

अभी हां यह देखना है की प्राइस कि लीवर पर कैलकुलेट किए जा रहे हैं यदि उत्पाद की कीमत होलसेल लेवल पर कैलकुलेट की जा रही है तो उसे बोलते हैं होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI)    

यदि उत्पाद की गणना रिटेल स्तर पर की जा रही है तो उसे कहते हैं कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI)  

किसी भी इकोनॉमी में दो चीज होती हैं इन्फ्लेशन और डिफ्लेशन। 

 इन्फ्लेशन (inflationary): 

यदि उपभोक्ता द्वारा उपयोग की जाने वाली चीजों की कीमतें बढ़ती हैं तो उसे इन्फ्लेशन कहते हैं। 

 

डिफ्लेशन  (Deflation):

यदि उपभोक्ता द्वारा उपयोग की जाने वाली गुड्स एंड सर्विसेज की कीमतें घटती हैं तो उसे डिफ्लेशन कहते हैं। 

डिफ्लेशन होता है तो महंगाई घटती है परंतु यह आवश्यक नहीं की यह हमेशा अच्छा ही हो। 

एक आइडियल इन्फ्लेशन कि अगर हम बात करें तो 2% से 4% इन्फ्लेशन को आइडियल माना जाता है। इसमें इकोनामिक ग्रोथ भी होती रहती है और लोगों के अंदर मोटिवेशन भी बना रहता है जिससे कि वह नए-नए इन्वेस्टमेंट करते रहते हैं। इकोनॉमी के अंदर पैसा आता रहता है जिससे कि इकोनामिक ग्रोथ होती रहती है। 

अगर डिफ्लेशन होगा तो महंगाई तो कम होगी परंतु उससे होता क्या है कि लोगों का मोटिवेशन खत्म हो जाता है लोग बचत और इन्वेस्टमेंट के बारे में ज्यादा सोचते नहीं है जिससे कि इकोनामिक ग्रोथ रुक जाती है। इसलिए सभी देशों की सरकारी भी यही चाहती हैं की इन्फ्लेशन रेट 2% से 4% के बीच में रहे। 

अब हम यह देखते हैं कि इंफ्लेशन कैसे कैलकुलेट होता है। भारत में इसका क्या सिस्टम है। 

भारत में पहले होलसेल स्तर पर गुड्स एंड सर्विसेज की कीमतों का आकलन किया जाता था। 

 

प्राइमरी आर्टिकल       22.6% 

फ्यूल एंड पावर          13.2%

 मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट     64.2%

 

प्राइमरी आर्टिकल में फूड एंड नॉन फूड वह सारे आर्टिकल जो रो फॉर्म में बाजार में उपलब्ध है जिनको मैन्युफैक्चर्ड नहीं किया जा रहा है जैसे कि अनाज दालें। 

प्राइमरी आर्टिकल फ्यूल एंड पावर एंड मैन्युफैक्चर्ड गुड्स के तीन हुई क्रांतिकारी के प्रोडक्ट को वेट डीपीआई इंडेक्स में ऊपर दिए गए प्रतिशत के अनुसार होता था। परंतु होलसेल लेवल पर किए गए कीमतों के आकलन में एक खामी थी कि यह वह कीमत नहीं थी जो अंततः एक उपभोक्ता को मिलती थी। 

इसलिए अन्य देशों की तरह भारत में भी कंज्यूमर को प्राप्त कीमतों पर गणना की जाने लगी जिसे कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स CPI कहते हैं। भारत में 2013 में की इंट्रोड्यूस डी किया गया है। 

 

जैसे कि हम बात कर रहे हैं महंगाई दर की या रिटेल इन्फ्लेशन की या जैसे कि आप देख पा रहे हैं CPI (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) यह दोनों तीन ऑन चीज एक ही है। 

अब सवाल यह उठता है कि CPI क्या है यह एक इंडेक्स है जो कुछ गुड्स एंड सर्विसेस को मिलाकर बनता है। 

 

| विवरण                                                    |  वजन |

|—————————————- |———| |

सिरियल्स एंड प्रोडक्ट्स                            | 12.35   | |

मीट एंड फिश                                           | 4.38    | |

अंडा                                                         | 0.49    | |

दूध और दूध से बने उत्पाद                        | 7.72     | |

तेल और फैट्स                                          | 4.21     | |

फल                                                          | 2.88    | |

सब्जियाँ                                                    | 7.46     | |

दाल और दाल से बने उत्पाद                     | 2.95     | |

चीनी और मिठाई                                      | 1.70     | |

मसाले                                                      | 3.11      | |

नॉन-एल्कोहोलिक बेवरेजेस                      | 1.37      | |

तैयार भोजन, स्नैक्स, मिठाई, आदि             | 5.56    | |

खाद्य और पेय                                        | 54.18   | |

पान, तंबाकू और नशाकारी सामग्री       | 3.26     | |

कपड़ा                                                       | 6.32     | |

जूते                                                            | 1.04    | |

कपड़ा और जूते                                      | 7.36 | |

आवास                                                   | 21.67 | |

ईंधन और प्रकाश                                         | 7.94 | |

घरेलू सामान और सेवाएँ                                | 3.75 | |

स्वास्थ्य                                                        | 6.83 | |

परिवहन और संचार                                      | 7.60 | |

मनोरंजन और आनंद                                     | 1.37 | |

शिक्षा                                                            | 3.46 | |

व्यक्तिगत देखभाल और प्रभाव                      | 4.25 | |

 विविध   (Miscellaneous )                 | 27.26 | |

सामान्य सूची (सभी समूह)                       | 100.00 | |

उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूची (CFPI)         | 47.25 |

 

खाने पीने की वस्तुएं होती हैं। 

हाउसिंग कास्ट होती है। 

मिसलेनियस ( विविध ) में ट्रांसपोर्टेशन, कम्युनिकेशन, एजुकेशन  और हेल्थ केयर आ जाता है जिसका फूड एंड बेवरेज के बाद सीपीआई इंडेक्स में सबसे अधिक योगदान है।

इस तरह से एक आम आदमी की आवश्यकताओं को मिलाकर एक बास्केट बना ली जाती है जिसमें  गुड्स ओर सर्विसेज दोनों होती है।  इन सब की कीमतों में जो बदलाव होता है 1 महीने से दूसरे महीने में या एक तिमाही से दूसरी तिमाही में क्या वार्षिक स्तर पर देखें तो 1 वर्ष से दूसरे वर्ष में इस बदलाव को एक फार्मूले के माध्यम से हम कैलकुलेट करते हैं जिसे CPI कहते हैं।

Indian Family

CPI तीन तरह के होते हैं

CPI (Rural ग्रामीण )

CPI  (Urban-शहरीय)

CPI  (combined- ग्रामीण एवं शहरीय)

 

इन तीनों को अलग-अलग जारी किया जाता है। जैसे की अमेरिका में जब की कैलकुलेट किया जाता है तो उधर बेस ईयर 1982 -83 को लिया गया है। चूंकि भारत में की अभी हाल 2013 में ही इंट्रोड्यूस किया गया है इसलिए हमारे यहां 2012 को बेस ईयर माना गया है। इसका मतलब है कि 2012 में सीपीआई इंडेक्स की वैल्यू को 100 मनके आगे गणना की जाएगी।                                                                                 cpi impacted our food too

CPI कैसेकैलकुलेट करें

  1. गुड्स एंड सर्विसेज कीएक बास्केट बनाएं (Creat a Basket of goods and services)
  2. बास्केट की एक कीमत निकले ( Determine the basket’s Cost)  
  3. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की गणना  Calculate the Consumer Price Index (CPI)

गुड्स एंड सर्विसेज की एक बास्केट बनाएं (Create a Basket of Goods and Services):

की बास्केट मेंवह सभी तरह गुड्स एंड सर्विसेज होती हैंजो लोगों द्वाराउपयोग की जाती हैं L इसमें सभी श्रेणी की चीज जैसे खाने पीने से जुड़ी हुई वस्तुएं, विभिन्न, पेय पदार्थ ,घर-मकान, कपड़े, यातायात, ट्रांसपोर्टेशन, दवाइयां, हॉस्पिटल के बिल, मनोरंजन के सभी साधन (टेलीविजन सिनेमा इत्यादि), संचार साधन, शिक्षा, इसके अलावाऔर अन्य चीज एवं विभिन्न प्रकार की सेवाएंथी सम्मिलित की जाती हैं L

इस इकोनामिक सर्वे में CPI डाटा  कलेक्टर डाटा कलेक्ट करता है L

उदाहरण के लिए अगर हम खास प्रकार के भैंस के दूध से बने घी की बात करें ( किसी विशेष ब्रांड का कोई विशेष प्रोडक्ट) और वह तीन प्रकार की पैकिंग में बाजार में आता है 1 किलो 1/2 किलो और 250 ग्राम। 

इस कैटेगरी के घी की बिक्री में तीनों पैकिंग में से 80 परसेंट बिक्री 1 किलो घी के पैकेट की होती है। 10% बिक्री 1/2 किलो घी पैकेट की होती है, और 20% बिक्री 250 ग्राम के पैकेट की होती है।  इसका मतलब है कि 1 किलो घी के पैकेट की बिक्री 8 गुना है  1/2 किलो के पैकेट की बिक्री से। 

इस प्रकार रेंडम सिलेक्शन चयन प्रक्रिया द्वारा एक प्रकार के ब्रांड और कंटेनर का आकार चुना जाता है जी विशेष प्रकार के घी का चयन किया गया है उसकी कीमत प्रति माह इस नोट की जाती रहेगी। 

और इसी प्रकार अन्य ब्रांड अन्य प्रोडक्ट की भी अलग-अलग कैटेगरी में लिस्टिंग कर उनकी कीमतों को एक समय अंतराल में किसी विशेष किराना शॉप या आउटलेट से ली जाती रहेगी। 

 

 

बास्केट की लागत निर्धारण करना ( Determine The Basket’s Cost )

 

बास्केट में गुड्स ओर सर्विसेज तय हो जाने के बाद अगला कदम हमारा टोकरी में मौजूद सभी वस्तुओं की कीमतों का गणना करना है। 

अब बास्केट की साइज उसमें सामान ( उत्पाद ) और सेवाएं निश्चित होने के बाद समय के साथ-साथ सिर्फ एक चीज में परिवर्तन आएगा वह होगी उन सामानों और सेवाओं की कीमतें । 

उदाहरण के तौर पर हमारी बास्केट में 3 सेब  हैं( 2020 में एक सेब की कीमत ₹5 थी) और

 4 केले हैं। ( 2019 में एक केले की कीमत ₹1 थी )

 

तो 2019 में बास्केट की कुल कीमत –

3 🍎 * 5 + 2🍌 *1  = ₹17

 

2020 में एक सेब की कीमत ₹7 और एक केले की कीमत ₹2 हो जाती है। 

 

तो 2020 में बास्केट की कुल कीमत-

3 🍎 * 7  +  2 🍌 2  =  ₹25

 

इस प्रकार हम देख सकते हैं की 2019 से 2020 के बीच कीमत बड़ी है यह सरल उदाहरण देकर आपको समझने की कोशिश की है परंतु CPI की गणना इससे कहीं अधिक जटिल है।

कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की गणना  Calculate the Consumer Price Index (CPI)

 

सीपीआई इंडेक्स में हर उत्पाद , सामान और सेवाओं का एक वैटेज (Weights) होता है। उस वैटेज के अनुसार ही उस उत्पाद की इंडेक्स में योगदान या हिस्सेदारी होती है।

 

कंस्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) जनवरी 2024

 

ऊपर लिंक में दी गई टेबल के अनुशार हर उत्पाद को  प्राइस इनडेक्स मैं वैटेज (weightage)  दिया जाता है। 

उसी वैटेज के अनुसार सीपीआई (CPI) की गड़ना होती है ।

 

 

फार्मूला :

 

 

बास्केट का कुल मूल्य टारगेट वर्ष में

consumer प्राइस इंडेक्स CPI       =     ———————————————–   x   100

बास्केट का कुल मूल्य आधार वर्ष में

 

 

 

 

उदाहरण के तौर पर 

उदाहरण 1:  

नवंबर 2012 को की इंडेक्स की वैल्यू 100 मानते हैं

 

1 वर्ष बाद नवंबर 2013 में की 110 हो जाता है 

 

इसका मतलब है 10 अंकों की वृद्धि। हम परसेंटेज में

 

बात करें तो 10% का इजाफा इन्फ्लेशन में हो गया। 

 

उदाहरण 2:

 

अगर हम 

नवंबर 2012 में इन्फेक्शन 102 और 

नवंबर 2013 में इन्फ्लेशन 114 है तो 

 

110-102 / 102* 100

12/102 * 100 

= 11.76%

 

नवंबर 2013 में इन्फ्लेशन 11.76% होगा। 

 

Note : इन्फ्लेशन कभी भी महिनाबार (MOM) नहीं होता है यह एयर ओं एयर (YOY) होता है या वार्षिक होता है। 

 

 

 

Calculate the Consumer Price Index (CPI)

 

 Create a Basket of Goods and Services

 

FAQ:

 

भारत में की कब इंट्रोड्यूस किया गया?

भारत में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स 2013 में इंट्रोड्यूस किया गया और इसकी गणना के लिए बेस ईयर 2012 को माना गया। 

 

 Create a Basket of Goods and Services

 

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