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खेल मंत्रालय ने नवनिर्वाचित WFI अध्यक्ष संजय सिंह को हटाया

खेल मंत्रालय ने संजय सिंह को WFI के अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया है, साथ ही मंत्रालय ने नवनिर्वाचित भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की कार्यकारिणी को भारतीय पहलवानों के विरोध के मध्य 24 तारीख को बर्खास्त कर दिया है। यह खेल मंत्रालय का बड़ा फैसला है। खेल मंत्रालय ने कहा स्पोर्ट्स कोड के खिलाफ । 

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शशिभूषण सिंह के साये मे संजय सिंह

संजय सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के बाद आशीर्वाद लेने शशि भूषण सिंह के घर पहुंचे, उनका आशीर्वाद लिया। जीत के बाद शशिभूषण सिंह का ये नारा बहुत वायरल हुआ ” दबदबा है , दबदबा रहेगा ” बिलकुल भी गरिमा पूर्ण नहीं था। जहाँ पर निर्वाचित संजय सिंह हुए थे परन्तु देखने से ऐसे लग रहा था की शशिभूषण सिंह का निर्वाचन हुआ है।

इस पर खेल मंत्रालय ने बयान जारी कर यह कहा कि (according to aaj tak news) ऐसा लग रहा है कि नवनिर्वाचित समिति इस घर से चल रही है जिस घर में वह लोग रहते हैं जिनके खिलाफ महिला खिलाड़ियों ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। मंत्रालय ने यह भी कहा कि स्पोर्ट कोड के तहत ऐसा नहीं हो सकता। 

क्योंकि कोर्ट के आदेश पर मैं 2022 में खेल मंत्रालय ने 40 खेल संघो के पदाधिकारी को बुलाकर साफ कर दिया था कि उनके खेल संघ भारत कोर्ट के अनुसार होने चाहिए। जिसके लिए खेल मंत्रालय ने 30 जून 2022 तक का मोहलत दी थी। इसी स्पोर्ट कोड का हवाला देते हुए मंत्रालय ने नवनिर्वाचित भारतीय कुश्ती महाशंघ की कार्यकारणी को अनुचित ठहराते हुए भंग करने का अपना फैसला सही बताया। 

अब आगे होता क्या है यह देखने वाली बात है क्योंकि फैसला खेल मंत्रालय द्वारा लिया गया है जिसने यह कहा है की जो नए चुने हुए पदाधिकारी यों ने भारतीय कुश्ती महासंघ का संचालन संभाला है वह चुकी सपोर्ट कोर्ट के अनुरूप नहीं है इसलिए आगे मंत्रालय समिति के साथ बैठक करता है कोई या फिर दूसरा तरीका निकाल कर लाता है यह भविष्य में देखने वाली बात होगी। आगे की आगे आने वाले समय में खेल मंत्रालय क्या कदम उठाता है इस पर उनकी अभी कोई गाइडलाइन नहीं आई है। 

हालाँकि संजय सिंह ने इस पर कहा है कि उन्हें अभीतक कोई लेटर नहीं मिला है । परन्तु उनसे जोड़े एक सूत्र ने बताया कि संजय सिंह का चुनाव स्पोर्ट्स कोड के अनुशार हुआ है और खेल मंत्रालय के फैसले को हम कोर्ट मैं चैलेंज करेंगे।

 जैसा कि पिछले दिन हम लोगों ने देखा कि हमारे देश के प्रसिद्ध एवं पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित पहलवान बजरंग पूनिया ने अपना अवार्ड कल वापस सौंप दिया था। 

भारत की गोल्ड मेडलिस्ट महिला पहलवान साक्षी मलिक जिन्होंने बृजभूषण सिंह (WFI पूर्व अध्यक्ष) पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे और जिसके चलते खिलाड़ियों ने उनके खिलाफ सड़कों पर आकर आंदोलन किया था, उन्होंनेसंजय सिंहकी संजय सिंह की भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष चुने जाने पर पहलवानी के खेल से संन्यास ले लिया हमेशा हमेशा के लिए। संजय सिंह के अध्यक्ष चुने जाने पर महिला पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि ऐसे लोग अगर फेडरेशन में रहेंगे जो शशि भूषण सिंह के भाई जैसा और उसका बिजनेस पार्टनर भी है तो ऐसे लोगों के साए में महिलाएं कैसे सुरक्षित रह सकती हैं। 

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पहलवान बजरंग पूनिया ने मोदी जी से मिलने का समय मांगा था और समय नहीं मिल पाने की अवस्था में उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के सामने फुटपाथ पर ही अपना पद्मश्री अवार्ड एक ओपन लेटर के साथ रख दिया था जिसे बाद में पुलिस वालों ने अपने कब्जे में ले लिया था यह यह भावनाओं से ओत-प्रोत प्रधानमंत्री के लिए ओपन लेटर जिसमें बजरंग पूनिया ने कहा कि देश में पद्मश्री अवार्ड देकर जो मुझे सम्मान दिया था परंतु मैं जब महिलाओं की आत्मसम्मान की रक्षा के लिए कुछ नहीं कर सका तो ऐसा सम्मानित इंसान बनकर मैं नहीं जीत पाऊं जी पाऊंगा। 

संजय सिंह के निलंम्बन का फैसला आने के बाद बजरंग पुनिया ने कहा कि

“क्या बृजभूषण आज बीजेपी से भी बड़ा हो गया है? क्या सरकार से भी बड़ा है बृजभूषण. उन्होंने कहा कि जो बॉडी बनाई जाती है वो पहलवानों, खिलाड़ियों की मदद के लिए बनाई जाती है लेकिन ये खुल कर कह रहे हैं कि दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा. उनके बेटे ने सोशल मीडिया पर ये डाला है. पहलवान तो पहले से ही कह रहे हैं कि अच्छे लोग आएंगे तो हम उनका स्वागत करेंगे.”

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हालांकि शशि भूषण सिंह पर लगाए हुए यौन शोषण के का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। और मंत्रालय की इस फैसले को मोरल लेवल पर बहुत लोग सही भी मान रहे हैं परंतु परंतु बात समय की है क्योंकि आने वाले कुछ ही समय में ओलंपिक गेम्स के ट्रायल होने हैं जिसमें हमारे भारतीय खिलाड़ियों को हिस्सा लेना है भारतीय कुश्ती महासंघ की भंग होने से भारतीय पहलवानों का ओलंपिक में भाग लेना कटाई में पड़ता नजर आ रहा है। 

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